प्यारे पथिक

जीवन ने वक्त के साहिल पर कुछ निशान छोडे हैं, यह एक प्रयास हैं उन्हें संजोने का। मुमकिन हैं लम्हे दो लम्हे में सब कुछ धूमिल हो जाए...सागर रुपी काल की लहरे हर हस्ती को मिटा दे। उम्मीद हैं कि तब भी नज़र आयेंगे ये संजोये हुए - जीवन के पदचिन्ह

Tuesday, June 22, 2010

नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं


नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं
गढ़ लेते हैं स्वप्न जिनका कोई आधार नहीं

एक ख्याल की बंदिश पर कई राग सजाते है,
यूँ ही बैठे बैठे, न जाने किंतने आलाप लगाते हैं
वो सरगम गाते हैं जिसका कोई रचनाकार नहीं 
नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं...

कैसा भी हो काव्य-भाव बस अनुराग सुझाता है
टूटे-फूटे छंदों पर भी, मन अलंकार सजाता है
वो गीत सुनाते है जिसका कोई गीतकार नहीं
नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं...

सुख-दुःख के पखवाड़े पर, आशा-दीप जलाते है
बैरी ह्रदय पुष्प पर भी बन प्रीत-भ्रमर मडराते है
सब अपने से लगते हैं, पराया यह संसार नहीं
नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं...

बहकी बहकी बातों से मन को बहलातें हैं
घंटों बस मौन से न जाने क्या बतियाते हैं
उन प्रश्नों पर ठहरे जिनको उत्तर दरकार नहीं  
नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं...

15 comments:

  1. एक ख्याल की बंदिश पर कई राग सजाते है,
    यूँ ही बैठे बैठे, न जाने किंतने आलाप लगाते हैं
    वो सरगम गाते हैं जिसका कोई रचनाकार नहीं
    नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं...
    kya baat kahi hai! Wah!

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  2. नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं

    बिल्कुल सही..उम्दा रचना!

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  3. टूटे-फूटे छंदों पर भी, मन अलंकार सजाता है
    वो गीत सुनाते है जिसका कोई गीतकार नहीं...
    सच ही नैनों से बड़ा कोई शिल्पकार नहीं ...
    बहुत सुन्दर कविता ...!!

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  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....आनंद आया यह गीत पढ़ कर .

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  5. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  6. नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं
    गढ़ लेते हैं स्वप्न जिनका कोई आधार नहीं

    कल्पना की पूऱी प्रक्रिया को एक छन्द में निचोड़ कर रख दिया है ।

    नया ब्लॉग प्रारम्भ किया है, आप भी आयें । http://praveenpandeypp.blogspot.com/2010/06/blog-post_23.html

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  7. नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं
    बहुत सुन्दर!

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  8. फेसबुक से मित्र मंजीत की टिप्पणी...

    Manjit Rochlani commented on your note "नयनो से बड़ा होता कोई &...":

    "Nice. Jeevan se bhari teri aakhe..."

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  9. फेसबुक से मित्र वागीश की टिप्पणी...

    Vagish Gupta commented on your note "नयनो से बड़ा होता कोई &...":

    "Hi Sudhir, Good poetry , except last line which seems out of rhythm. Is it yours? I means the whole poem and not just last line :-)"

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  10. फेसबुक से मित्र वागीश की दूसरी टिप्पणी

    Vagish Gupta commented on your note "नयनो से बड़ा होता कोई &...":

    "Dear Sudhir, After reading again, I find Whole poem is good. I I liked even the use of word (darkar)...these kind of words(khayal, bandish, darkar) generally seen in Gulzaar's poetry :-)...so its like mix of Agyeya and Gulzar. Keep it up.
    Will read others when have time."

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  11. मंगलवार 29 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार


    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. ठीक कहा .....नयनो से बड़ा होता कोई शिल्पकार नहीं

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  13. क्या बात कही है आपने अपनी कविता मे, वाकई नयनों से बड़ा कोई शिल्पकार नही होता। मनभावन और सुहावन कविता।

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