जब प्रिय! तुम मिलते हो तो अच्छा लगता हैं,
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
पिछले सावन की बरसातें हम जिनसे बच कर भागे थे
उनकी कोरी बूंदों को गालों पर रखने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
जिन खाली काली लम्बी रातों में घंटों ख़ुद से बतियातें थे ,
उनके आगोश में लिपटकर तेरी राहें तकने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
उनकी कोरी बूंदों को गालों पर रखने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
जिन खाली काली लम्बी रातों में घंटों ख़ुद से बतियातें थे ,
उनके आगोश में लिपटकर तेरी राहें तकने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
कितने ख्याबों की तामीर रहे तुम औ' कितनों में तुम आते थे,
उस एक तमन्ना से घबरा कर अब जागते रहने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
उस एक तमन्ना से घबरा कर अब जागते रहने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
बीते सारे लम्हे, जिन पर फुर्सत में तुने मेरे नाम लिखे थे,
यूँ ही उन सब को मुठ्ठी में थामे रखने को मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
यूँ ही उन सब को मुठ्ठी में थामे रखने को मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
बहुत भुलाया किस्सा यह, बहुत छिपाया रिश्ता यह,
अब दो पल तुझको सबसे अपना कहने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।
अब दो पल तुझको सबसे अपना कहने का मन करता हैं।
तेरे काँधे पर सर रखकर रोने का मन करता हैं।